
Uttarakhand Green Tax 2025:
पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड अब अपने पर्यावरण को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि दिसंबर 2025 से Uttarakhand Green Tax 2025 लागू किया जाएगा। इस नियम के तहत, राज्य के बाहर से आने वाले वाहनों को उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करते समय “ग्रीन टैक्स” देना होगा।
सरकार का उद्देश्य इस कदम के जरिए बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना और राज्य की सड़कों पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना है। हर साल लाखों पर्यटक उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन स्थलों – जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल, मसूरी, औली और बद्रीनाथ-केदारनाथ – की यात्रा करते हैं। ऐसे में गाड़ियों की संख्या और प्रदूषण दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।
क्या है उत्तराखंड ग्रीन टैक्स 2025
Uttarakhand Green Tax 2025 एक पर्यावरणीय शुल्क (Environmental Cess) है जिसे राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों से वसूला जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन उत्सर्जन और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
सरकार ने इस टैक्स को लागू करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग को दी है। ये विभाग मिलकर सीमा चौकियों (Check Posts) पर टैक्स वसूली की व्यवस्था करेंगे। इसके लिए ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरे लगाए जाएंगे जो वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करके उसकी रजिस्ट्री को स्वतः पहचान लेंगे।
किन वाहनों पर लगेगा टैक्स
इस टैक्स का प्रभाव केवल अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड (Out-of-State) वाहनों पर पड़ेगा। यानी यदि कोई वाहन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान या किसी अन्य राज्य में पंजीकृत है और उत्तराखंड में प्रवेश करता है, तो उस पर ग्रीन टैक्स लागू होगा।
वहीं, उत्तराखंड में रजिस्टर्ड वाहनों को टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV), CNG वाहन, हाइब्रिड वाहन, दो-पहिया वाहन और आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
कितना देना होगा ग्रीन टैक्स
सरकार ने अभी ग्रीन टैक्स की अनुमानित दरें तय की हैं, जो वाहन के प्रकार और आकार के अनुसार अलग-अलग होंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- छोटी निजी कारों (Hatchback/Sedan) के लिए टैक्स ₹80 से ₹100 तक होगा।
- SUV या बड़ी कारों पर टैक्स ₹150 तक लगाया जा सकता है।
- कमर्शियल वाहन जैसे ट्रक, बस या टेम्पो के लिए टैक्स ₹120 से ₹700 तक रखा गया है।
यह टैक्स एक बार राज्य में प्रवेश के दौरान लिया जाएगा, यानी अगर आप एक ही बार उत्तराखंड में प्रवेश कर रहे हैं तो दोबारा भुगतान की जरूरत नहीं होगी।
टैक्स भुगतान की प्रक्रिया
पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए सरकार ने टैक्स वसूली को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। FASTag सिस्टम से यह राशि स्वतः कट जाएगी। जैसे ही वाहन की नंबर प्लेट सीमा कैमरे में स्कैन होगी, उसका डेटा फास्टैग सर्वर से मैच होगा और टैक्स राशि सीधे उसी वॉलेट से कट जाएगी।
इससे यात्रियों को किसी तरह की लंबी प्रक्रिया या चेकपोस्ट पर लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया कैशलेस और ऑटोमैटिक होगी।

सरकार का तर्क – पर्यावरण की सुरक्षा और राज्य की कमाई दोनों
उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, इस टैक्स से राज्य को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व मिलेगा, जिसे पर्यावरण और पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में खर्च किया जाएगा।
पर्यटन सीजन में हजारों गाड़ियाँ रोजाना उत्तराखंड की सीमाओं में प्रवेश करती हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं, ईंधन का उपयोग और ध्वनि प्रदूषण राज्य के नाजुक इको-सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार का कहना है कि अगर यह टैक्स लागू नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र प्रदूषण के दबाव में आ सकते हैं।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों की राय
जहाँ एक ओर पर्यावरण प्रेमी और विशेषज्ञ इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, वहीं कुछ पर्यटक इसे “अतिरिक्त बोझ” मान रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही टोल टैक्स और पार्किंग चार्ज बढ़ चुके हैं, ऐसे में ग्रीन टैक्स यात्रा को महंगा बना देगा।
हालांकि स्थानीय निवासियों का मानना है कि इससे राज्य को सीधा फायदा होगा। प्रदूषण कम होगा, सड़कों का रखरखाव बेहतर होगा और पर्यटन स्थलों पर सफाई व्यवस्था सुधरेगी।
उत्तराखंड सरकार की तैयारी
राज्य सरकार ने सीमा चौकियों पर ऑटोमैटिक टैक्स कलेक्शन सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर यह सिस्टम दिसंबर 2025 तक स्थापित किया जाएगा।
साथ ही, पर्यटकों को पहले से सूचित करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च करने की भी योजना है। इससे लोग अपनी यात्रा से पहले ही टैक्स राशि की जानकारी ले सकेंगे और ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे।
अन्य राज्यों में भी लागू हो चुका है ऐसा टैक्स
गौरतलब है कि उत्तराखंड से पहले हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में भी ग्रीन टैक्स लागू किया जा चुका है। शिमला और मनाली में आने वाले बाहरी वाहनों से हर प्रवेश पर टैक्स लिया जाता है। उसी तर्ज पर उत्तराखंड भी अब यह मॉडल अपना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्य का पर्यावरण संरक्षित रहेगा और सड़क व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ेगा।




