
Tata Consultancy Services: भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने जुलाई 2025 में एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। कंपनी ने लगभग 12,261 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की घोषणा की है। यह छंटनी अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है, जिसने पूरे आईटी सेक्टर में हलचल मचा दी है।
किन कर्मचारियों पर पड़ा असर?
TCS की यह छंटनी मुख्यतः मिड-लेवल और सीनियर-लेवल प्रोफेशनल्स पर की जा रही है। यानी वे कर्मचारी जो कई वर्षों से कंपनी में कार्यरत थे और जिनका अनुभव 6–15 साल तक था, उन्हें अब बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।
कंपनी ने बताया कि इन कर्मचारियों को पहले अन्य प्रोजेक्ट्स में समायोजित (redeploy) करने की कोशिश की गई, लेकिन आवश्यक स्किल्स की कमी और नए टेक्नोलॉजी स्टैक से मेल न खाने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।
क्या AI के कारण हो रही है छंटनी?
नहीं। TCS के CEO के. कृतिवासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह छंटनी AI (Artificial Intelligence) या ऑटोमेशन की वजह से नहीं हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण है:
- स्किल मिसमैच (Skill Mismatch)
- प्रोजेक्ट्स की सीमित संख्या
- रीस्किलिंग के बाद भी कर्मचारियों का fit न हो पाना
TCS के अनुसार, जिन कर्मचारियों को दूसरी जगह नहीं समायोजित किया जा सका, उन्हें हटाना पड़ा।
सरकार और यूनियनों की तीखी प्रतिक्रिया
TCS की इस छंटनी पर कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा:
“एक झटके में 12,000 से ज्यादा लोगों की छंटनी बहुत ही खतरनाक है।”
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार अब आईटी कंपनियों को दी गई श्रम कानूनों से छूट की समीक्षा कर रही है। इसके अलावा, TCS से इस फैसले का स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दूसरी तरफ, NITES (IT Employees Union) और कर्नाटक की IT यूनियनों ने भी इस फैसले को गैरकानूनी और अमानवीय बताया है। यूनियनों का आरोप है कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया कि वे स्वेच्छा से इस्तीफा दें, जिससे कंपनी पर कानूनी कार्यवाही न हो सके।
क्या कहता है डेटा?
बिंदु विवरण
कुल कर्मचारी ~6.1 लाख
छंटनी की संख्या 12,261 कर्मचारी
असर किन पर मिड और सीनियर लेवल कर्मचारी
मुख्य कारण स्किल गैप और प्रोजेक्ट फिट न होना
AI जिम्मेदार? नहीं
Conclusion: स्किल अपडेट है ज़रूरी
TCS की यह छंटनी केवल एक कंपनी का फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सिस्टमेटिक बदलाव का संकेत है। आज की आईटी इंडस्ट्री में निरंतर स्किल अपडेट और री-स्किलिंग बहुत ज़रूरी हो चुका है।
सरकार को भी अब यह समझने की ज़रूरत है कि श्रमिक अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर नीति बनानी होगी। आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, अगर सही दिशा में कदम नहीं उठाये गए।




