Swiggy और Zomato की बड़ी रणनीति
Swiggy Zomato delivery incentive: भारत की प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियां Swiggy और Zomato एक बार फिर चर्चा में हैं। साल के अंत में बढ़ते ऑर्डर प्रेशर और gig workers strike के बाद दोनों कंपनियों ने अपने delivery partners के लिए इंसेंटिव बढ़ाने का फैसला लिया है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है:
- पीक आवर्स में डिलीवरी पार्टनर्स की उपलब्धता बढ़ाना
- New Year Eve पर किसी भी तरह की सर्विस बाधा से बचना
- 25 दिसंबर की वॉकआउट जैसी स्थिति दोबारा न बनने देना
कंपनियां मानती हैं कि अगर राइडर्स ऑनलाइन नहीं रहते, तो पूरा प्लेटफॉर्म मॉडल प्रभावित होता है।
25 दिसंबर की Gig Workers Strike क्यों अहम थी?
25 दिसंबर को देश के कई शहरों में Swiggy और Zomato से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स ने काम रोक दिया था।

यह कोई अचानक घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का नतीजा थी।
Riders की मुख्य शिकायतें
- बेस पे लगातार कम होती जा रही है
- लंबी दूरी के ऑर्डर पर अतिरिक्त भुगतान नहीं
- इंसेंटिव टारगेट पूरे करना मुश्किल
- ईंधन और मेंटेनेंस का खर्च खुद उठाना
इस strike की वजह से कुछ इलाकों में:
- ऑर्डर कैंसिल हुए
- डिलीवरी टाइम बढ़ा
- ऐप पर “No delivery partner available” दिखने लगा
यहीं से कंपनियों पर दबाव बढ़ गया।

New Year Rush: कंपनियों के लिए सबसे बड़ा टेस्ट
हर साल 31 दिसंबर और 1 जनवरी फूड डिलीवरी इंडस्ट्री के लिए सबसे व्यस्त दिन होते हैं।
डेटा के अनुसार:
- ऑर्डर वॉल्यूम सामान्य दिनों से 30–50% ज्यादा
- Late night delivery की मांग कई गुना बढ़ जाती है
- Party orders और bulk food orders चरम पर होते हैं
ऐसे समय पर अगर delivery partners उपलब्ध न हों, तो:
- ग्राहक नाराज होते हैं
- ऐप की रेटिंग गिरती है
- ब्रांड इमेज को नुकसान होता है
इसी कारण Swiggy और Zomato ने short-term incentive boost देने का फैसला किया।
Delivery Incentive बढ़ने का मतलब क्या है?
यहां समझना जरूरी है कि इंसेंटिव बढ़ना ≠ बेस सैलरी बढ़ना।
कंपनियों ने मुख्य रूप से ये कदम उठाए हैं:
- पीक आवर्स में प्रति ऑर्डर अतिरिक्त राशि
- तय संख्या में ऑर्डर पूरे करने पर बोनस
- कुछ शहरों में टाइम-बेस्ड इंसेंटिव
नीचे इसे आसान भाषा में टेबल में समझिए
| कैटेगरी | पहले | अब (Year-End Period) |
|---|---|---|
| Peak Hour Incentive | सीमित या नहीं | प्रति ऑर्डर अतिरिक्त भुगतान |
| Daily Order Target Bonus | उच्च टारगेट | कम टारगेट + ज्यादा बोनस |
| Late Night Delivery | सामान्य रेट | अतिरिक्त इंसेंटिव |
| Short Distance Orders | कम भुगतान | कुछ शहरों में बेहतर रेट |
ध्यान दें: यह स्ट्रक्चर शहर और समय के हिसाब से अलग हो सकता है।

Gig Workers क्यों कह रहे हैं कि यह स्थायी समाधान नहीं?
Delivery partners और gig workers संगठनों का कहना है कि:
- इंसेंटिव सिर्फ दबाव के समय बढ़ाया जाता है
- बेस पे में सुधार नहीं किया जाता
- सोशल सिक्योरिटी और इंश्योरेंस अभी भी कमजोर है
उनकी मांगें साफ हैं:
- Minimum guaranteed income
- पारदर्शी pay calculation
- लंबी दूरी के ऑर्डर पर बेहतर भुगतान
उनका मानना है कि हर बार त्योहार या strike के डर से इंसेंटिव देना problem की जड़ को नहीं सुलझाता।
ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
ग्राहकों के लिए फिलहाल यह फैसला राहत देने वाला है।
Positive Impact
- New Year पर ऑर्डर मिलने की संभावना ज्यादा
- कम डिलीवरी डिले
- कम कैंसिलेशन
Possible Negative Impact
- कुछ इलाकों में delivery charge बढ़ सकता है
- Surge pricing लागू हो सकती है
हालांकि कंपनियां कोशिश कर रही हैं कि ग्राहकों पर बोझ कम पड़े।
Food Delivery Industry के लिए क्या संकेत मिलते हैं?
यह पूरा मामला दिखाता है कि:
- Gig economy पूरी तरह workers पर निर्भर है
- Delivery partners के बिना platform टिक नहीं सकता
- आने वाले समय में government और courts का दखल बढ़ सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 तक:
- gig workers rights
- minimum pay rules
- insurance coverage
जैसे मुद्दों पर नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
final verdict
Gig workers strike और New Year rush के बीच Swiggy और Zomato का delivery incentive बढ़ाना एक तत्काल और जरूरी कदम है।
हालांकि इससे short-term में स्थिति संभल जाएगी, लेकिन long-term में कंपनियों को delivery partners की आय और सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनानी होगी।
यह सिर्फ फूड डिलीवरी की खबर नहीं, बल्कि भारत की gig workers के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।




