शेयर बाजार में आज क्यों आई तेज गिरावट?
भारतीय शेयर बाजार में आज निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंकों तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 26,150 के अहम स्तर से नीचे बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा और निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई।
यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर बने दबाव का नतीजा रही। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, सेक्टोरल कमजोरी, करेंसी अस्थिरता और मुनाफावसूली जैसे बड़े कारण शामिल हैं।
1. भू-राजनीतिक तनाव से बिगड़ा ग्लोबल सेंटिमेंट

शेयर बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और वेनेजुएला से जुड़ी ताजा घटनाओं, पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर बढ़ते राजनीतिक टकराव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम भरे एसेट्स जैसे शेयरों से पैसा निकालकर सेफ हेवन यानी सोना, डॉलर या बॉन्ड की ओर रुख करते हैं। इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव देखने को मिला।
2. विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
आज की गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भूमिका भी अहम रही। पिछले कुछ सत्रों से FII भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और उभरते बाजारों से पूंजी का पलायन—इन सब कारणों से विदेशी निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। जब FII बिकवाली करते हैं, तो बाजार में दबाव तेजी से बढ़ता है और इंडेक्स पर सीधा असर पड़ता है।
3. IT और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी
आज के कारोबार में आईटी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में नजर आए।
- आईटी कंपनियों पर वैश्विक मंदी की आशंका और डॉलर की चाल का असर दिखा।
- बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली और वैल्यूएशन को लेकर चिंता रही।
इंडेक्स में भारी वेटेज रखने वाले इन सेक्टर्स में गिरावट आने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर बड़ा असर पड़ा।
4. रुपये में उतार-चढ़ाव और मैक्रो दबाव
भारतीय रुपये में जारी अस्थिरता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रुपये में कमजोरी का सीधा असर
- आयात लागत
- कच्चे तेल की कीमत
- और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है।
इसके अलावा, वैश्विक ब्याज दरें, महंगाई से जुड़ी चिंताएं और आर्थिक संकेतकों को लेकर अनिश्चितता ने बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर किया।
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5. ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली (Profit Booking)
पिछले कुछ हफ्तों में बाजार ने रिकॉर्ड स्तरों को छुआ था। ऐसे में कई निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली को सही समझा।
निफ्टी के लिए 26,300–26,400 का स्तर तकनीकी रूप से मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा था। जैसे ही बाजार इन स्तरों के पास पहुंचा, बिकवाली बढ़ गई और इंडेक्स नीचे फिसल गया।
बाजार का हाल: किन शेयरों पर सबसे ज्यादा असर?
आज के सत्र में
- बड़े कैप शेयरों में दबाव
- मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी देखी गई।
हालांकि, कुछ डिफेंसिव सेक्टर जैसे FMCG और फार्मा में सीमित गिरावट रही, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख नकारात्मक बना रहा।
निवेशकों के लिए आगे की रणनीति क्या हो?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट घबराने का नहीं, बल्कि सतर्क रहने का समय है।
- शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है
- लॉन्ग टर्म निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करना चाहिए
- बिना रिसर्च के खरीदारी या बिकवाली से बचना जरूरी है
Final Verdict
आज शेयर बाजार में आई गिरावट साफ संकेत देती है कि बाजार अभी वैश्विक संकेतों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव, FII की बिकवाली, सेक्टोरल दबाव, रुपये की कमजोरी और मुनाफावसूली—इन सभी ने मिलकर सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचा।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों के सेंटिमेंट पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए फिलहाल संयम और समझदारी से कदम उठाना ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।





