हिंदी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में 5 जनवरी 2026 एक ऐतिहासिक दिन बन गया, जब Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation की आधिकारिक घोषणा सामने आई। सौरभ द्विवेदी ने इंडिया टुडे ग्रुप के लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘द लल्लनटॉप’ से अलग होने का ऐलान कर दिया। यह फैसला न सिर्फ मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका है, बल्कि उन करोड़ों दर्शकों के लिए भी भावुक क्षण है, जो सालों से उनकी पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं।
कौन हैं सौरभ द्विवेदी?

सौरभ द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता का वह नाम हैं, जिन्होंने खबर कहने का अंदाज़ ही बदल दिया। सरल भाषा, देसी टच और गहराई से सवाल पूछने की कला ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।
उन्होंने पारंपरिक टीवी पत्रकारिता से निकलकर डिजिटल मीडिया में एक नया प्रयोग किया, जो आगे चलकर ‘द लल्लनटॉप’ के रूप में सामने आया।
‘द लल्लनटॉप’ की शुरुआत और सफर
साल 2016 में सौरभ द्विवेदी ने इंडिया टुडे ग्रुप के तहत The Lallantop की शुरुआत की। उस समय डिजिटल हिंदी कंटेंट को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन लल्लनटॉप ने यह सोच बदल दी।
लल्लनटॉप की बड़ी उपलब्धियां:
- यूट्यूब पर 3.5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर
- हिंदी डिजिटल न्यूज़ में ट्रेंडसेटर की पहचान
- युवाओं से लेकर ग्रामीण दर्शकों तक मजबूत पकड़
Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उस व्यक्ति का जाना है, जिसने इस प्लेटफॉर्म को ज़ीरो से शिखर तक पहुंचाया।

नेता नगरी और लंबे इंटरव्यू: पहचान की वजह
सौरभ द्विवेदी के शो ‘नेता नगरी’ ने भारतीय राजनीति को व्यंग्य और तथ्यों के अनोखे मिश्रण के साथ पेश किया। इसके अलावा उनके लंबे इंटरव्यू — चाहे वह राजनेताओं के हों या समाज के प्रभावशाली चेहरों के — दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर करते थे।
उनकी खासियत थी:
- सीधे सवाल
- बिना डर के संवाद
- सत्ता से जवाबदेही
Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation: इस्तीफ़े की वजह क्या है?
सौरभ द्विवेदी ने अपने बयान में साफ किया कि यह फैसला किसी विवाद या दबाव की वजह से नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि वह अब स्टडी लीव पर जाना चाहते हैं और अपने जीवन के अगले अध्याय के लिए खुद को तैयार करना चाहते हैं।
उनके अनुसार:
- यह एक नेचुरल ट्रांजिशन है
- नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का समय आ गया है
- सीखने और खुद को री-डिस्कवर करने की जरूरत है
लल्लनटॉप में नेतृत्व परिवर्तन
Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation के बाद लल्लनटॉप में नेतृत्व की जिम्मेदारी नए चेहरों को सौंपी गई है।
नई जिम्मेदारियां:
- कुलदीप मिश्रा – संपादकीय नेतृत्व
- रजत साईं – प्रोडक्शन और क्रिएटिव जिम्मेदारी
इसे इंडिया टुडे ग्रुप ने एक Generational Shift बताया है, ताकि प्लेटफॉर्म भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहे।
मीडिया जगत की प्रतिक्रियाएं
सौरभ द्विवेदी के इस्तीफ़े पर पूरे मीडिया जगत से प्रतिक्रियाएं आईं।
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लल्लनटॉप को हिंदी डिजिटल मीडिया का Trendsetter बताया। सोशल मीडिया पर पत्रकारों, यूट्यूबर्स और दर्शकों ने इसे एक युग का अंत करार दिया।
एक यूज़र ने लिखा:
“लल्लनटॉप बिना सौरभ वैसा ही है, जैसे गाजर के हलवे से गाजर निकाल दी जाए।”
यह प्रतिक्रिया बताती है कि Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation केवल एक नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का टूटना है।
दर्शकों पर क्या असर पड़ेगा?
लल्लनटॉप के करोड़ों दर्शकों के मन में सवाल है — क्या प्लेटफॉर्म पहले जैसा रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है:
- लल्लनटॉप की टीम मजबूत है
- ब्रांड अब एक व्यक्ति से बड़ा हो चुका है
- लेकिन सौरभ द्विवेदी की शैली की कमी ज़रूर खलेगी
सौरभ द्विवेदी का आगे क्या प्लान?
फिलहाल सौरभ द्विवेदी ने किसी नए प्रोजेक्ट का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि वह पढ़ाई, रिसर्च और आत्म-मंथन के लिए समय लेना चाहते हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में अटकलें तेज़ हैं कि:
- वह कोई नया डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू कर सकते हैं
- या स्वतंत्र पत्रकारिता के नए मॉडल पर काम कर सकते हैं
- संभव है किताब या डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट पर भी काम करें
हिंदी पत्रकारिता के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
Saurabh Dwivedi Lallantop Resignation हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। उन्होंने साबित किया कि:
- हिंदी कंटेंट भी क्वालिटी और व्यूज़ दोनों में आगे हो सकता है
- डिजिटल पत्रकारिता गंभीर और प्रभावशाली हो सकती है
- भाषा, अगर अपनी हो, तो सीधा दिल तक पहुंचती है
Final Verdict
सौरभ द्विवेदी का लल्लनटॉप से जाना एक युग का अंत जरूर है, लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि एक नए सफर की शुरुआत भी हो सकता है। उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों को प्रेरणा देती रहेगी।
यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि हिंदी डिजिटल मीडिया के विकास की कहानी का अहम अध्याय है।




