रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी बहुप्रतीक्षित आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं। “Putin India Visit 2025” न केवल भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, बल्कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और भारत की रणनीतिक भूमिका दक्षिण एशिया से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रही है। पुतिन की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग को अगले दशक तक मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली में पुतिन का स्वागत कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच किया गया। राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद उनका काफिला सीधे होटल ITC Maurya के लिए रवाना हुआ, जहाँ उनके रहने की विशेष व्यवस्था पहले से की गई है। भारत सरकार ने इस यात्रा को उच्च प्राथमिकता देते हुए राजधानी में सुरक्षा, ट्रैफिक और कार्यक्रमों की योजना को पूरी तरह अपडेट किया है ताकि पुतिन की मूवमेंट में कोई बाधा न आए।
दिल्ली में सुरक्षा अभेद्य किले जैसी, ITC Maurya के ‘Chanakya Suite’ में पुतिन का ठहराव
राष्ट्रपति पुतिन को भारत में Z+ स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसके लिए दिल्ली को इस समय “लीवर-5 सिक्योरिटी जोन” में रखा गया है। SPG, NSG, दिल्ली पुलिस, RAW और रूस की FSO सुरक्षा टीम मिलकर पूरे ऑपरेशन को संभाल रही हैं। एयरपोर्ट से लेकर होटल और फिर सम्मेलन स्थलों तक हर जगह सुरक्षा घेरा तीन से पाँच परतों में तैनात है। हर चेकपॉइंट पर स्नाइपर टीम, ड्रोन जैमर और एंटी-सबोटाज यूनिट्स तैनात हैं।
दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक परिवर्तन लागू कर दिए गए हैं और कई हिस्सों में आम वाहनों की एंट्री समय-समय पर रोकी जा रही है। होटल ITC Maurya के आसपास का पूरा इलाका 2 किलोमीटर तक सुरक्षा घेराबंदी में है, जहाँ आम लोगों और मीडिया की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।

पुतिन को ITC Maurya के प्रसिद्ध Chanakya Suite में ठहराया गया है, जो भारत में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए सबसे सुरक्षित और लक्ज़री कमरों में से एक माना जाता है। यह सुइट करीब 4600+ वर्गफुट में फैला हुआ है और इसकी रात का किराया सामान्य तौर पर ₹8–10 लाख के बीच माना जाता है। इस फ्लोर को पूरी तरह खाली कर दिया गया है ताकि सुरक्षा में कोई जोखिम न रहे। सुइट में बुलेटप्रूफ ग्लास, सुरक्षित संचार प्रणाली, प्राइवेट डायनिंग एरिया, मीटिंग रूम और एक्सक्लूसिव सिक्योरिटी सेटअप जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं। पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति, ब्रिटिश प्रधानमंत्री और जापान के प्रधानमंत्री इसी सुइट में ठहरे चुके हैं—यानी यह भारत का सबसे हाई-प्रोफाइल स्टे विकल्प है।
इस बीच दिल्ली के 5-स्टार होटलों में भी रूम किराए इस समय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। कई होटलों में रेट ₹80,000 से लेकर ₹1.3 लाख प्रति रात तक जा चुके हैं क्योंकि राजधानी में कई बड़े कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस एक साथ चल रहे हैं। पुतिन की यात्रा के दौरान होटल बुकिंग में असाधारण उछाल देखने को मिला है।

शिखर बैठक: रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और नई तकनीक पर अहम फैसलों की उम्मीद
“Putin India Visit 2025” का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली शिखर वार्ता है। यह बैठक हैदराबाद हाउस में आयोजित हो रही है, जहाँ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी चलेगी। इस बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और वैश्विक कूटनीति जैसे क्षेत्रों पर कई महत्वपूर्ण समझौतों का मसौदा तैयार किया जाएगा।
भारत–रूस रक्षा सहयोग दशकों पुराना है और दोनों देशों की सेनाओं के लिए यह साझेदारी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उम्मीद है कि बैठक में रक्षा तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त उत्पादन, एयर-डिफेंस सिस्टम, फाइटर जेट अपग्रेड और पनडुब्बियों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होगी। भारत अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिए रूस को एक स्थिर और विश्वसनीय साझेदार मानता है, और यह यात्रा उस साझेदारी को और मजबूत बना सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी समझौते बड़े हो सकते हैं। 2022 के बाद से रूस भारत का एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। अब दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक तेल आपूर्ति समझौते, सस्ते कच्चे तेल की खरीद, LNG सौदे और रूस के Far East क्षेत्रों में भारतीय निवेश पर विस्तृत बातचीत होगी। भारत को ऊर्जा सुरक्षा चाहिए और रूस एशियाई बाज़ारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है—इसलिए दोनों की जरूरतें एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाती हैं।
व्यापार के क्षेत्र में, दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को 50–60 बिलियन डॉलर तक ले जाने का है। इसके लिए नए भुगतान सिस्टम, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, North–South Transport Corridor, और नए सेक्टरों में निवेश पर विचार होगा। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल तकनीक और मीडिया क्षेत्र में भी नई साझेदारियों के संकेत मिल रहे हैं।
अंतरिक्ष अनुसंधान में भी भारत और रूस का पुराना सहयोग रहा है। इस यात्रा में संयुक्त उपग्रह निर्माण, अंतरिक्ष मिशन सहयोग, अंतरिक्ष सुरक्षा और नई तकनीक पर MoU साइन किए जा सकते हैं। भारत आने वाले वर्षों में मानव अंतरिक्ष मिशन और नई नेविगेशन तकनीक पर आगे बढ़ रहा है, जहाँ रूस की विशेषज्ञता उपयोगी मानी जा रही है।

यह यात्रा क्यों है ज़रूरी? वैश्विक राजनीति पर भारत–रूस समीकरण का असर
पुतिन का यह भारत दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला—यह संदेश देता है कि भारत अपनी “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” को लेकर प्रतिबद्ध है। भारत किसी भी वैश्विक ब्लॉक का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है, चाहे पश्चिम का दबाव हो या पूर्व का प्रभाव।
दूसरा—भारत रूस को दीर्घकालिक ऊर्जा और रक्षा साझेदार के रूप में देखता है। ऐसे समय में जब दुनिया में आपूर्ति श्रृंखलाएँ अस्थिर हैं, भारत के लिए विविध स्रोतों से ऊर्जा और हथियार आपूर्ति रणनीतिक रूप से बेहद ज़रूरी है।
तीसरा—रूस के लिए भारत एक बड़ा बाजार, एक विश्वसनीय राजनीतिक साझेदार और एशिया में बेहद महत्वपूर्ण शक्ति है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस अपनी आर्थिक और कूटनीतिक दिशा एशिया की ओर मोड़ रहा है, जहाँ भारत एक स्वाभाविक और मजबूत सहयोगी है।
इन सब कारणों से “Putin India Visit 2025” सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आने वाले दशक के भारत–रूस संबंधों की दिशा तय करने का मौका है।




