
Jammu Kashmir cloudburst kishtwar: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोटी गांव में बुधवार दोपहर बादल फटने (Cloudburst) से आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 38 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में दो सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवान भी शामिल हैं। कई लोग अब भी लापता हैं, जिससे आशंका है कि मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
बचाव और राहत कार्य में सेना की तैनाती
जैसे ही घटना की सूचना मिली, भारतीय सेना, NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सेना के हेलीकॉप्टरों और रेस्क्यू बोट्स की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
दृश्य बेहद भयावह थे — गांव की गलियों में पानी और कीचड़ भर गया, कई घर, दुकानें और वाहन पानी में बह गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी का तेज बहाव इतना खतरनाक था कि कुछ ही मिनटों में सब कुछ तबाह हो गया।
पुलिस का आधिकारिक बयान
पुलिस कंट्रोल रूम, किश्तवाड़ के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 38 शव बरामद कर लिए गए हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। राहत शिविरों में पीड़ित परिवारों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।
मचैल माता यात्रा पर असर
चशोटी गांव, मचैल माता यात्रा का शुरुआती पड़ाव है। यह किश्तवाड़ जिले का आखिरी मोटरेबल गांव है, जहां से श्रद्धालु हिमालय के माता चंडी मंदिर की ओर आगे बढ़ते हैं। यह वार्षिक यात्रा अगस्त- सितंबर में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
लेकिन इस भीषण आपदा के चलते वार्षिक मचैल माता यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे फिलहाल यात्रा स्थगित होने की सूचना का पालन करें और प्रभावित क्षेत्र में न जाएं।
स्थानीय लोगों का दर्द
गांव के एक निवासी ने बताया, “हमने पहले तेज बारिश की आवाज सुनी और फिर अचानक एक तेज धारा हमारे गांव की तरफ बढ़ती हुई आई। कुछ ही मिनटों में सब कुछ बह गया।”
कई परिवारों ने अपने घर और खेत दोनों खो दिए हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए ग्रामीण और सेना मिलकर काम कर रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और सहायता
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।
NDRF और SDRF की अतिरिक्त टीमें भी भेजी गई हैं, ताकि मलबे में दबे लोगों को निकाला जा सके और स्थिति पर काबू पाया जा सके।
बादल फटने के कारण और असर
विशेषज्ञों के अनुसार, बादल फटना तब होता है जब कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है, जिससे अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में यह खतरा ज्यादा होता है क्योंकि वहां पानी का बहाव तेज होता है और गांव- कस्बे जल्दी डूब जाते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून पैटर्न के कारण प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।




