दिव्या देशमुख ने रचा इतिहास: FIDE महिला शतरंज विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, कोनेरू हम्पी को टाई-ब्रेकर में हराया

By: Vijay

On: Tuesday, July 29, 2025 11:08 PM

Divya Deshmukh chess champion
Divya Deshmukh chess champion
Divya Deshmukh chess champion


19 वर्षीय दिव्या ने दुनिया को दिखाया भारतीय प्रतिभा का दम, ग्रैंडमास्टर बनीं और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालीफाई किया

जुलाई 28, 2025 | बातुमी, जॉर्जिया:

भारत की युवा शतरंज स्टार दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने FIDE महिला शतरंज विश्व कप 2025 के फाइनल में भारत की ही दिग्गज ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी को हराकर न केवल खिताब जीता, बल्कि इस टूर्नामेंट को जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी बन गईं।

टाई-ब्रेकर में तय हुई चैंपियन की किस्मत

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। दो दिन तक चले क्लासिकल गेम्स दोनों खिलाड़ियों के बीच ड्रॉ रहे। इसके बाद फाइनल का फैसला रैपिड टाई-ब्रेकर के ज़रिए हुआ।

  • पहला टाई-ब्रेकर रैपिड गेम: ड्रॉ
  • दूसरा टाई-ब्रेकर रैपिड गेम: दिव्या देशमुख ने ब्लैक पीसेज़ (काले मोहरे) से खेलते हुए जीत हासिल की।

दिव्या की यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय महिला ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीता है।

कोनेरू हम्पी: भारतीय शतरंज की दिग्गज

38 वर्षीय कोनेरू हम्पी भारत की सबसे सफल महिला शतरंज खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने सालों तक देश का प्रतिनिधित्व किया है और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीते हैं। उनका इस फाइनल तक पहुँचना भी भारतीय शतरंज की शक्ति को दर्शाता है।

हालांकि वह खिताब नहीं जीत सकीं, लेकिन उनके अनुभव और संयम ने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।

दिव्या देशमुख: एक नई सुपरस्टार का उदय

दिव्या देशमुख का यह सफर एक प्रेरणा है। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने साबित किया है कि कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और रणनीति के दम पर दुनिया के किसी भी मंच पर जीत हासिल की जा सकती है।

Divya Deshmukh chess champion

दिव्या की इस जीत के साथ:

  • उन्हें FIDE ग्रैंडमास्टर का टाइटल मिल गया है
  • वह अब फीडे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं
    • वह भारत की सबसे युवा महिला विश्व कप विजेता बनीं

भारत के लिए गौरव का क्षण

यह फाइनल सिर्फ दो खिलाड़ियों के बीच नहीं था — यह दो पीढ़ियों, अनुभव बनाम उत्साह का मुकाबला था। और सबसे खास बात यह रही कि दोनों ही खिलाड़ी भारत से थीं, जिसने यह सुनिश्चित किया कि खिताब किसी भारतीय के ही नाम होगा।

इस जीत ने भारत को वैश्विक शतरंज मानचित्र पर और भी ऊंचा स्थान दिलाया है। यह एक संकेत है कि आने वाले समय में भारत से और भी वर्ल्ड चैंपियन निकलेंगे।

दिव्या देशमुख की यह जीत सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं है, यह नई पीढ़ी की उम्मीदों, मेहनत और हौसले की जीत है। कोनेरू हम्पी की भूमिका भी उतनी ही अहम रही, जिनके मुकाबले ने दिव्या को मजबूत बनाया।

Vijay

Vijay Yadav is a passionate content creator who covers the latest news, automobiles, and technology updates in a clear and simple way. His goal is to make every topic easy to understand for Hindi-speaking readers.
For Feedback - contact@hindidailyblog.in

1 thought on “दिव्या देशमुख ने रचा इतिहास: FIDE महिला शतरंज विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, कोनेरू हम्पी को टाई-ब्रेकर में हराया”

Leave a Comment